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Showing posts from May, 2020

अपना नागाजी स्कूल

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और कुछ अपनी भी नागा जी की यादे जरूर बताएं।। वो भी क्या दिन थे न! जब कोई पूछता था किस स्कूल में पढ़ते हो तो जवाब में नागाजी ना बोलके एक ही साँस में नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,  बताते थे। Pic year - 2018 निर्माणधिन विद्यालय view from first floor : Year 2018 हालांकि हम लोगो का आधा जीवन ये बताने में निकल जाता था कि "अरे भैया हम माल्देपुर वाला नागा जी मे नही बल्कि जिराबस्ति वाला में पढ़ते है" और बलिया के आधी जनता को तो ये मालूम नही की जिराबस्ति में भी कोई नागाजी चल रहा है खैर हम लोग भी कभी कभी माल्देपुर बता कर टेलर बाध देते थे दूसरे स्कूल वाले जहाँ टाई संवारते हुए बसों से स्कूल जाते थे वहीं हमलोग साईकल का हैंडल से हैंडल लड़ाते हुए अपने दोस्तों के साथ बात करते हुए जाना पसंद करते थे, वो सब जब खुद को  इंग्लिश मीडियम वाले बता के हमारे हिंदी माध्यम का उपहास उड़ाते थे तो हम अपने विद्यालय का रिजल्ट बता के उन्हें शांत कराते थे। क्लासटीचर और सब्जेक्टटीचर नहीं थे हमारे यहाँ हम तो उन्हें कक्षाचार्य और विषयाचार्य के नाम से जानते ...

मेरी माँ

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जो औरत  अपने बच्चों को बलिया से इलाहाबाद जाने वाली सारनाथ एक्सप्रेस पकड़वाने के लिए स्टेशन से दूर गाव में ठंडे भोर में                       चकरि की तरह घूमने लगती है दो महीने का राशन ,  दो वक्त की रोटी बांधकर मोबाइल ,चार्जर, से बनियान,स्वेटर तक सब रखने को पूछती है  और फिर हा सुनकर अपने आँशु जब्त कर अपने बच्चें को गले लगाकर             माथा चुम  अपने आँचल के खुटे में बंधी  मोरोड़े हुए नोटो को देकर कहती  ""जूस पी लेना " ध्यान रख अपना औऱ जब पूछती कि "अब कब आएगा '' तो लगता है, मानो दुनिया की हर चीज़ भूल जाऊँ, पर दिलासा माँगती इस ममता को कभी न भूलूँ. ऐसी है मेरी माँ              - आशुतोष राज "आशु"❤️ Happy mother's day