बनारस : शहर से इश्क़
बनारस शहर नहीं उत्सव है ! विश्व भर में यह अकेली नगरी है जहाँ, त्रयाक्ष भगवान शंकर की पुनर्जीवनी अग्नि घड़ी भर के लिए भी शांत नहीं होती ! मेरे हर बार लौट-लौटकर बनारस आने के पीछे, कोई वजह नही है बनारस ही बेवजह प्रेम है सबका अपना बनारस है किसी के लिए घाट, किसी के लिए मंदिर,किसी के लिए गलियां,हम जैसों के लिए वो निर्माणधीन धूल खाता आधुनिकता की ओर बढ़ता खूबसूरत शहर ,जहां बार बार लौट कर आने की हसरत बनी रहती है, BHU में एडमिशन की कोशिश हो , एग्जाम का सेंटर डाल कर आने की मन या दूर की शादिया निमंत्रण निभाने के बहाने बनारस जाने की चाहत चंद लम्हो के लिए ही सही,अकेले नही उन यादो-वादो,,उन शामो और रातों की खातिर,एक कोशिश फिर से उसे जीने की बनारस आते जाते रहूंगा .जहाँ हर कोई "गुरू" या "रज्जा" है... किसी नशे की लत तो आम बात हैं, "नशा" जब किसी शहर का हो जाये, तो समझ लेना वो भैया बनारस है..!! कहते है कि यहां भोले बाबा का सबसे पसन्दीदा प्रसाद " भांग" मिलता है पर आप थोड़ा ही लेंगे उसके बाद बाबा खुदे हिलाने लगते है न विश्वास हो तो आइयेगा ... यहाँ गंग...