ट्रेन वाली लड़की 🚂
मैं ट्रेन हमेशा जल्दी पहुँच जाता हूँ,कम से कम घण्टे पहले, आराम से एक सीट पकड़ के बैठ कर देखता रहता हूँ खासकर "खिड़की वाली सीट" "" क्योंकि किरदार ट्रेन में होते है पर "कहानिया" तो खिड़कियों से ही झांकती है इसलिए मैं खिड़कियों को पकड़ लेता हूं कहानियों के लिए कहानियाँ,कहीं मिलने की तो कहीं बिछड़ने की.. किसी के पकड़ने की तो किसी के छूटने की पर हर ट्रेन कहानियां जरूर दे जाता है अक्सर मेरी क़िस्मत खराब ही रही है ट्रेन में, मतलब ज़्यादातर कोई झुर्रियो वाला चेहरा होता है पास में या बाहर कमाने जाने वाला शर्ट खोलकर बनियान में बैठा कोई प्रवासी बस साल में एक दो बार ही ऐसा होता है कि सुंदर काया औऱ अदाओं की कोई माया बैठी हो आस पास ख़ैर ठीक है, उन्हें भी तो ब्रेक चाहिए.. मैं अपनी सीट पर बैठा था फ़िल्म लगाए " Zindgi na milegi dobara " अचानक सिक्स्थ सेन्स ने काम करना शुरू कर दिया, लगता है कोई आ रही है बग़ल वाली सीट पर, धक धक, आंटी हुई तो नही नही, फिर सो जाएँगे और क्या, मन बातें कर ही रहा था के एक आवाज़ आयी, “Can yo...