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Showing posts from June, 2020

सफ़रनामा ज़िन्दगी

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कभी कभी लगता है हार गया हूँ! ज़िंदगी से! सब ख़त्म सा लगता है! कोई दिशा नहीं समझ आती! सब कुछ भ्रमित करता है! किसी इंसान से इन्स्पायर नही होता! कभी भी नही! हाँ ख़ूबी ज़रूर अच्छी लगती है किसी की! बहुत से पॉज़िटिव लोगों से घिरा हुआ हूँ! क़िस्मत का धनी  होना ये भी है कि समझने वाला परिवार मिले , अच्छे दोस्त मिले ! पर एक समय बाद हार कोई आपसे उम्मीद करने लगता है! हर कोई! छोटा भाई, बहन, माँ-बाप सब! और ये बात बिना उनके बोले आप समझ सकते हैं! कभी कभी खुद की समझदारी भी खुदसे कठिन सवाल पूछती है.... लगता है ज्यादा समझदार होना भी गुनाह है क्या ??? कई साथी आपको कई राय देते हैं! हिंदुस्तान में राय ही एक ऐसी चीज़ है जो आदमी मुफ़्त में देता रहता है! कई लोग आपको जज करते फिरते हैं! वो आपसे मिलते ही आपको बताना शुरू कर देते हैं कि आप ग़लत कहाँ पर है!  कई ऐसे लोग भी मिलते हैं जो आपके ऐसे शुभचिंतक होते हैं जो आपकी बड़ी से बड़ी हार पर भी आपसे सकारात्मक बात करा करते ह कई बार चीज़ें धुंधली लगती हैं, समझ नही आता के पास हैं या दूर.. जैसे खिड़की पर बूँदो का जमना....... देखने पर पास लग...

अधूरी राधा

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आज प्यार भले  फेसबुक से पैदा होकर whtas app पर जवान हो जाय.. लेकिन किसी जमाने में कालेज के सामने वाली चाट की दूकान से शुरू होकर  दशहरा और जन्माष्टमी के मेला वाली जलेबी की दुकान पर ही मंजिल पाता था।…. शायद प्यार की मंजिल पाने वालों के साथ ट्रेजडी थी..क्योंकि प्यार के साथ टेक्नोलॉजी का गठबंधन न हुआ था ।लाइक,कमेंट,शेयर जैसे शब्दों की मौजूदगी  का एहसास इतना व्यापक न था. ऑनलाइन समय का दोष है…घर बैठे जोमैटो से बर्गर आ पिज़्ज़ा हट से पिज़्ज़ा माँगने वाली  और एमेजॉन,फ्लिपकार्ट और स्नैपडील पर खरीदारी करने वाली पीढ़ी को अब ये मेले,ठेले,छोले,जलेबी रास नहीं आ रहे. पर पुराना प्रेम का जिक्र तो आज भी उन्ही पुराने मेलो से सुरु होता है नौकरी की हतास और पढ़ाई की झुलास से तपे जा रहे थे जीवन मे  रुक्मिणी के लिए पढ़ाई हो रही थी पर यहां तो इनके जीवन मे राधा तक के भी दर्शन न हुए थे अभी ...पूजा पाठ वाले विचार के थे तो सोचा चलो कृष्ण जन्म पर प्रभु के दर्शन ही हो जाये  चल दिय उदासीन ज़िन्दगी को मेला की  रंगीन चौचक लाइटों के बीच टहलाते हुए  घर से दूर तो...