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बनारस : शहर से इश्क़

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बनारस शहर नहीं उत्सव है ! विश्व भर में यह अकेली नगरी है जहाँ, त्रयाक्ष भगवान शंकर की पुनर्जीवनी अग्नि घड़ी भर के लिए भी शांत नहीं होती !  मेरे हर बार लौट-लौटकर बनारस आने के पीछे, कोई वजह नही है  बनारस ही बेवजह प्रेम है सबका अपना बनारस है किसी के लिए घाट, किसी के लिए मंदिर,किसी के लिए गलियां,हम जैसों के लिए वो निर्माणधीन धूल खाता आधुनिकता की ओर बढ़ता खूबसूरत शहर ,जहां बार बार लौट कर आने की हसरत बनी रहती है, BHU में एडमिशन की कोशिश हो , एग्जाम का सेंटर डाल कर आने की मन या दूर की शादिया निमंत्रण निभाने के बहाने बनारस जाने की चाहत  चंद लम्हो के लिए ही सही,अकेले नही उन यादो-वादो,,उन शामो और रातों की खातिर,एक कोशिश फिर से उसे जीने की बनारस आते जाते रहूंगा .जहाँ हर कोई "गुरू" या "रज्जा" है... किसी नशे की लत तो आम बात हैं,  "नशा" जब किसी शहर का हो जाये,  तो समझ लेना वो भैया बनारस है..!! कहते है कि यहां भोले बाबा का सबसे पसन्दीदा प्रसाद " भांग" मिलता है पर आप थोड़ा ही लेंगे उसके बाद    बाबा खुदे हिलाने लगते है न विश्वास हो तो आइयेगा  ... यहाँ गंग...

धोनी ❤️अनहोनी

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महेन्द्र सिंह धोनी। क्या ही कहूँ। कोचिंग मैनुअल और कॉपीबुक शैली से इतर भारतीय क्रिकेट की अमूल्य सेवा। तीन पीढ़ियों ने पसंद किया।  महेंद्र सिंह धोनी का करियर ‘सचिन आउट, टीवी बंद करो’ से लेकर ‘ रुको बे अभी धोनी है  है’ तक का एक शानदार सफ़र रहा है। धोनी मोहल्ले का वो लड़का है जिसने सपने देखने का शऊर सिखाया।  आज के  समय में जो लोग भी छोटे शहर से बड़े शहर पहुँचे, उनके मन में कहीं न कहीं अपनी फील्ड का धोनी होने का सपना था धोनी ने हमें वो ट्रेन पकड़ने की हिम्मत दी जो जेब में टिकट होते हुए भी हर बार छूट जाती थी  आधे समय में सवाल कर परीक्षा हॉल छोड़ देता है। क्रिकेट खेला के लिए नौकरी-वौकरी भी। छोड़ देता है एक पाली की कप्तानी, पूर्व कप्तान के लिए। और फिर विश्व कप जीत जाने के बाद  छोड़ देता है भीड़, उन्माद और कोलाहल आँखें ढूँढती हैं उसे औऱ उसकी मुस्कान को हर फ़ोटो फ्रेम के कोने में खड़ा ..... वो रवि शास्त्री के शब्द जिन्होंने मुहर लगाई थी कि तुमने हेलीकॉप्टर शॉट से खत्म किया सूखा 28 साल का इंसान जब जान जाता है कि उसकी सीमाएं उसके प्र...

सफ़रनामा ज़िन्दगी

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कभी कभी लगता है हार गया हूँ! ज़िंदगी से! सब ख़त्म सा लगता है! कोई दिशा नहीं समझ आती! सब कुछ भ्रमित करता है! किसी इंसान से इन्स्पायर नही होता! कभी भी नही! हाँ ख़ूबी ज़रूर अच्छी लगती है किसी की! बहुत से पॉज़िटिव लोगों से घिरा हुआ हूँ! क़िस्मत का धनी  होना ये भी है कि समझने वाला परिवार मिले , अच्छे दोस्त मिले ! पर एक समय बाद हार कोई आपसे उम्मीद करने लगता है! हर कोई! छोटा भाई, बहन, माँ-बाप सब! और ये बात बिना उनके बोले आप समझ सकते हैं! कभी कभी खुद की समझदारी भी खुदसे कठिन सवाल पूछती है.... लगता है ज्यादा समझदार होना भी गुनाह है क्या ??? कई साथी आपको कई राय देते हैं! हिंदुस्तान में राय ही एक ऐसी चीज़ है जो आदमी मुफ़्त में देता रहता है! कई लोग आपको जज करते फिरते हैं! वो आपसे मिलते ही आपको बताना शुरू कर देते हैं कि आप ग़लत कहाँ पर है!  कई ऐसे लोग भी मिलते हैं जो आपके ऐसे शुभचिंतक होते हैं जो आपकी बड़ी से बड़ी हार पर भी आपसे सकारात्मक बात करा करते ह कई बार चीज़ें धुंधली लगती हैं, समझ नही आता के पास हैं या दूर.. जैसे खिड़की पर बूँदो का जमना....... देखने पर पास लग...

अधूरी राधा

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आज प्यार भले  फेसबुक से पैदा होकर whtas app पर जवान हो जाय.. लेकिन किसी जमाने में कालेज के सामने वाली चाट की दूकान से शुरू होकर  दशहरा और जन्माष्टमी के मेला वाली जलेबी की दुकान पर ही मंजिल पाता था।…. शायद प्यार की मंजिल पाने वालों के साथ ट्रेजडी थी..क्योंकि प्यार के साथ टेक्नोलॉजी का गठबंधन न हुआ था ।लाइक,कमेंट,शेयर जैसे शब्दों की मौजूदगी  का एहसास इतना व्यापक न था. ऑनलाइन समय का दोष है…घर बैठे जोमैटो से बर्गर आ पिज़्ज़ा हट से पिज़्ज़ा माँगने वाली  और एमेजॉन,फ्लिपकार्ट और स्नैपडील पर खरीदारी करने वाली पीढ़ी को अब ये मेले,ठेले,छोले,जलेबी रास नहीं आ रहे. पर पुराना प्रेम का जिक्र तो आज भी उन्ही पुराने मेलो से सुरु होता है नौकरी की हतास और पढ़ाई की झुलास से तपे जा रहे थे जीवन मे  रुक्मिणी के लिए पढ़ाई हो रही थी पर यहां तो इनके जीवन मे राधा तक के भी दर्शन न हुए थे अभी ...पूजा पाठ वाले विचार के थे तो सोचा चलो कृष्ण जन्म पर प्रभु के दर्शन ही हो जाये  चल दिय उदासीन ज़िन्दगी को मेला की  रंगीन चौचक लाइटों के बीच टहलाते हुए  घर से दूर तो...

अपना नागाजी स्कूल

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और कुछ अपनी भी नागा जी की यादे जरूर बताएं।। वो भी क्या दिन थे न! जब कोई पूछता था किस स्कूल में पढ़ते हो तो जवाब में नागाजी ना बोलके एक ही साँस में नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,  बताते थे। Pic year - 2018 निर्माणधिन विद्यालय view from first floor : Year 2018 हालांकि हम लोगो का आधा जीवन ये बताने में निकल जाता था कि "अरे भैया हम माल्देपुर वाला नागा जी मे नही बल्कि जिराबस्ति वाला में पढ़ते है" और बलिया के आधी जनता को तो ये मालूम नही की जिराबस्ति में भी कोई नागाजी चल रहा है खैर हम लोग भी कभी कभी माल्देपुर बता कर टेलर बाध देते थे दूसरे स्कूल वाले जहाँ टाई संवारते हुए बसों से स्कूल जाते थे वहीं हमलोग साईकल का हैंडल से हैंडल लड़ाते हुए अपने दोस्तों के साथ बात करते हुए जाना पसंद करते थे, वो सब जब खुद को  इंग्लिश मीडियम वाले बता के हमारे हिंदी माध्यम का उपहास उड़ाते थे तो हम अपने विद्यालय का रिजल्ट बता के उन्हें शांत कराते थे। क्लासटीचर और सब्जेक्टटीचर नहीं थे हमारे यहाँ हम तो उन्हें कक्षाचार्य और विषयाचार्य के नाम से जानते ...

मेरी माँ

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जो औरत  अपने बच्चों को बलिया से इलाहाबाद जाने वाली सारनाथ एक्सप्रेस पकड़वाने के लिए स्टेशन से दूर गाव में ठंडे भोर में                       चकरि की तरह घूमने लगती है दो महीने का राशन ,  दो वक्त की रोटी बांधकर मोबाइल ,चार्जर, से बनियान,स्वेटर तक सब रखने को पूछती है  और फिर हा सुनकर अपने आँशु जब्त कर अपने बच्चें को गले लगाकर             माथा चुम  अपने आँचल के खुटे में बंधी  मोरोड़े हुए नोटो को देकर कहती  ""जूस पी लेना " ध्यान रख अपना औऱ जब पूछती कि "अब कब आएगा '' तो लगता है, मानो दुनिया की हर चीज़ भूल जाऊँ, पर दिलासा माँगती इस ममता को कभी न भूलूँ. ऐसी है मेरी माँ              - आशुतोष राज "आशु"❤️ Happy mother's day 

सपनो की वेलिडिटी

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पता है कल सपने में किसको देखा किसको ?? तूमको !! चल झूठे अरे सच्ची बाबा अच्छा तो मैं क्या कर रही थी सपने में ?? शिकायत कर रही थी और मैं चुपचाप सुन रहा था अच्छा जी सपने में भी शिकायत ....ऐसा क्या बोल रही थी जनाब को यही कह रही थी कि तुम मेरे मुझे पास क्यों नही बुलाते तुम क्यों न मेरे सपने में आते हो?? ओहो मतलब सपने में भी आई तो न आने का इल्जाम लगा दी मैने सो तो है मैडम और मान लो किसी दिन सपने से चली गयी तो? अरे तो क्या हुआ मै हाज़िर हो जाऊंगा तुम्हारे सपने में जानेमन ओहो बड़ा प्यार आ रहा है आज अब तुमको प्यार करने के लिए दिन थोडे देखना पडेगा बड़ी बातें बनाते हो ....चलो लाओ मेरा Birthday gift birthday gift........ आज ले लेना सपने में आऊंगा तो अच्छा जी सपने में बकलोल कहि के अरे बकलोल न हु जितना समझती हो बस बस भागो यहा से बड़े आये सपने में गिफ्ट देने.... क्यों नही आ सकता क्या मैं तुम्हारे सपने में ?? आ सकते हो पर एक शर्त है बताओ जी शर्त इतनी है कि की *मेरे सपने और ज़िंदगी मे आने के लिए कोई शर्त न हो तुम्हारे लिए* Love you जानती हु बस बस फिर दोनों उस रात...