मेरी माँ


जो औरत 
अपने बच्चों को बलिया से इलाहाबाद जाने वाली सारनाथ एक्सप्रेस पकड़वाने के लिए
स्टेशन से दूर गाव में
ठंडे भोर में                      
चकरि की तरह घूमने लगती है
दो महीने का राशन , 
दो वक्त की रोटी बांधकर
मोबाइल ,चार्जर, से
बनियान,स्वेटर तक
सब रखने को पूछती है 
और फिर हा सुनकर
अपने आँशु जब्त कर
अपने बच्चें
को गले लगाकर            
माथा चुम 
अपने आँचल के खुटे में बंधी 
मोरोड़े हुए नोटो को देकर कहती 
""जूस पी लेना " ध्यान रख अपना

औऱ जब पूछती कि "अब कब आएगा ''

तो लगता है, मानो दुनिया की हर चीज़ भूल जाऊँ, पर दिलासा माँगती इस ममता को कभी न भूलूँ.

ऐसी है मेरी माँ

             - आशुतोष राज "आशु"❤️

Happy mother's day 

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