अपना नागाजी स्कूल
और कुछ अपनी भी नागा जी की यादे जरूर बताएं।।
वो भी क्या दिन थे न! जब कोई पूछता था किस स्कूल में पढ़ते हो तो जवाब में नागाजी ना बोलके एक ही साँस में नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बताते थे।
Pic year - 2018 निर्माणधिन विद्यालयview from first floor : Year 2018हालांकि हम लोगो का आधा जीवन ये बताने में निकल जाता था कि "अरे भैया हम माल्देपुर वाला नागा जी मे नही बल्कि जिराबस्ति वाला में पढ़ते है"
और बलिया के आधी जनता को तो ये मालूम नही की जिराबस्ति में भी कोई नागाजी चल रहा है खैर हम लोग भी कभी कभी माल्देपुर बता कर टेलर बाध देते थे
दूसरे स्कूल वाले जहाँ टाई संवारते हुए बसों से स्कूल जाते थे वहीं हमलोग साईकल का हैंडल से हैंडल लड़ाते हुए अपने दोस्तों के साथ बात करते हुए जाना पसंद करते थे, वो सब जब खुद को इंग्लिश मीडियम वाले बता के हमारे हिंदी माध्यम का उपहास उड़ाते थे तो हम अपने विद्यालय का रिजल्ट बता के उन्हें शांत कराते थे।
क्लासटीचर और सब्जेक्टटीचर नहीं थे हमारे यहाँ हम तो उन्हें कक्षाचार्य और विषयाचार्य के नाम से जानते थे,
कान्वेंट वाले जबतक अपने स्कूल का प्रेयर खत्म करके अपने क्रश से सेटिंग करने के जुगाड़ में भिड़े होते थे हम तब भी अपने विद्यालय के प्रांगण के कोने में बने सभागार में विधिवत प्रातः स्मरण, एकात्मता स्त्रोत, सरस्वती वन्दना, हे हंसवाहिनी ज्ञानदायनी, श्रीराम स्तुति, हनुमान चालिसा, मासिक गीत, शांति पाठ, का पाठ करने के बाद शपथ ग्रहण करते थे कि भारत हमारा देश है, हम सब भारतवासी भाई बहन हैं। सबसे खास बात केवल भाई होते थे बहन एक भी नही
और प्राथना के समय सब क्लास अपने अपने लाइन में जहा आगे से 15 बच्चे मन लगा के करते थे वंदना
और बाकी सिर नीचे करके बकचोदी वाला ज्ञान एक दुसरे में प्रवाहित करते थे हम खुद इनमें से एक थे
सबसे कठिन पहेली
पहेली ये थी कि "वो तीन बार ओम का उच्चारण "
ससुरा कम " ओ" ज्यादा बोलना है कब "म" कम बोलना है
मैं आज तक न सुलझा पाया बाकी लडको का पता नही
स्कुल का जन्नत शौचालय था तमाम अनैतिक राष्ट्रीय कार्य जैसे गुल फ़ाकना , नकल छुपाना , मउगाई बतियाना , पीरियड बिताना , ओर बाकी छोटा मोटा आदान प्रदान वही होता था
मेरे ख्याल से शौचायल को पर्यटन स्थल का दर्जा दे देना चईये
Pic - विद्यालय शौचालय
.अरे जब दूसरे स्कूलों वाले अपनी मूछें मुड़ा के और 127 ग्राम का मेकअप करके सामने आते थे न तो अपने विद्यालय के आचार्य जी का डायलॉग याद आ जाता था "मौगड़ा कहीं का मुंछ छिलता है, फान जाएंगे देहिये पे"।
वो सब जब अपनी बायो वाली मैम की फ़िगर की तारीफ़ में कुछ सुनाते थे न तो हमारे पास भी अपने हरेंद्र मिश्रा जी का डायलॉग "ऐ बाबू सुधर जाओ नहीं तो मारेंगे तो जहाँ से निकले हो वहीं ढूकै देंगे" "" आव न हई ले ल " सुनाने को होता था।
हर सरजी soory आचार्यजी का अपना विशेष डायलॉग होता था
हाँ! ये जो दूसरे स्कूलों में सो कॉल्ड पेरेंट्स टीचर मीटिंग होती थी न हमारे विद्यालय में इसे अभिभावक गोष्ठी का नाम दिया गया था,जिसमे बहुत कम ही अभिवावक आते थे तो स्कूल वालो ने नया जुगाड़ ढूढ लिया था
सभी विद्यार्थियों के घर जाकर आचार्य अभिभावक संवाद होता था जिसे "संपर्क" कहा जाता था। सम्पर्क भी पूरा दल बदल के साथ होता था 5-6 गुरुजी लोग साथही में ही
कान्वेंट वाले जब 10th के बाद हमारे विद्यालय में प्रवेश लेते थे तो अशुतोष आचार्य जी उन्हें पहले ही बता देते थे कि यहाँ सब बंजर है हरियाली नहीं मिलेगी यहाँ, कभी किताब घर पर छूट जाती तो बोलते थे- घरे बाबू के पढ़े खातिर छोड़ के आया है और यहाँ पीछे वाले बेंच पर साथे लथेरई कर रहा है।
खैर किताब वाली प्रॉब्लम का उपाय लौंडे निकाल लिए थे सब
दूसरे सेक्सन से किताब मांग के बचना
वो 9th क्लास में प्रमोदजी द्वारा मारने से पहले घड़ी खोलकर भूमिका बनाना कैसे भूल सकते है घड़ी खुल गयी तो समझ लो आज पीटे बेटा
और वो उमाशंकर जी द्वारा चलाया गया सुधारवादी आंदोलन को कैसे भुलाया जा सकता है जो मारने से पहले बोलते थे "राम रमैया गंगा मैया " और धोती को पाकिट में खोस के केहुनाठी से दे दनादन
कंधे पर फिर दूसरा वॉर सर् पर मार के बोलते रहते थे हाट भाट हाट भाट बैठता है कि नहीं तू।
घनश्याम जी का अपने कोचिंग में बुलाना हो , हरेंदजी का चुनाव लड़ना हो ,आशुतोष जी के सम्पर्क के IAS PCS के कहानियां हो या ज्ञानेंद्रजी का सूत्र पूछ के पीटना सब यादे आज भी आंखों में है और बनी रहेगी
आचार्य जी हमको ये लादेन लादेन बोल के चिढ़ा रहे हैं
और गुरुजी का जवाब
हमको भी तो लोग दढ़ि बाबा बोलबे न करता है तो हम क्या चिढ़ जाते है हम त दढ़िये बढ़ा लिये है
क्लास में लड़कों के नाम मे ऐसे ऐसे रखे जाते थे कि भारत की विविधता उनके नामो के सामने छोटी पड़ जाइ
नाम यहां लिख देंगे लड़को का तो बुरा मान जाएंगे लेकिन क्लास में किसी के असली नाम से कम ही बुलाया जाता था लेकिन बुरा न मानते थे
..और भी न जाने कितने आचार्य जी लोग थे जिनका नाम से ज्यादा हम उन्हें उनके उपनाम से जानते थे जैसे भोभाजी ,चिठु जी, बीडीजी , पगला , कनियाजी , मुर्गा-मुर्गी जी ,लिटीजी ,दढ़ि बाबा , चिंतामणि जी , नेउराजी , हचकन मिश्र जी , होमोयोपैथी जी , जोधन जी , पंडीजी महकूजी, इत्यादि
नाम भले कितना भी उटपटांग हो पर लास्ट में जी लगाना न भूलते थे
घनश्याम जी का कोचिंग में बुलाना हो , ज्ञानेंद्रजी का सूत्र पूछना
यही तो संस्कार मिला है पढ़ाई हर जगह होती है टॉपर हर जगह से निकलते है पर वो नैतिकता वाली बीज सायद आज भी शिशु मंदिरों और विद्या मंदिरों में ही बोई जाती है और बोई जातीरहेगी
बहुत कुछ यादें है अपने विद्यालय की, लिखते लिखते कलम की स्याही तक खत्म हो जाये लेकिन फ़िलहाल इतने में ही समेटने की कोशिश करते है कुछ आप भी अपने नाम के साथ सुना सकते है कमेंट बॉक्स आप लोगों के लिए हमेशा खुला हुआ है।
अपना नाम जरूर बताएं
नोट- ये पोस्ट किसी की भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से नहीं किया गया है, पुरानी स्मृतियों को संकलित करने और उसमें हास्य ढूढने की कोशिश है, अगर फिर भी किसी की भावना आहत होती है हम क्षमा घण्टा नही मांगते है
क्योंकि हम भी तो वही के पढ़े है न
आशुतोष राज "आशु"
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Comment your best experience in naga-ji
बेहतरीन मित्र ऐसे ही कुछ हमारी यादे भी है माल्देपुर की। हमे नागा जी ने शिष्टाचार रूपी अमूल्य ज्ञान दिया जो जीवन भर याद रहेगा।
ReplyDeleteOmg words..,👌so sweet school life, refresh my school days too
Delete❤️❤️❤️❤️❤️❤️
Deleteरामकुमार जी का मारना कम छड़ी से खोदना ज्यादा होता था
ReplyDeleteऔर हमलोग के समय जब आशुतोष जी का लड़का हुआ तो उनके लड़के का नाम रखे कीटोन और उनका नाम कीटोनवा के पापा
😂😂😂😂कीटोन
Deleteभाई मैं सज्जन .
ReplyDeleteएक दम लाजवाब लिखें हो😍
❤️❤️ मिश्राजी 🙏🙏
DeleteWo jindagi ke khubsurat lamho mai se ek the jo kabhi laut kar aane nahi wale ...aur ek famous dialog harendra mishra aacharyaji ka...tu kahe naekha let boka ke daware...hamesha yad rahega...miss u all my teachers students and those moments
ReplyDeleteHarendra g is always remember with his dialogue 😂😂आव न ले ल नोबेल पुरुसकरवा
Deleteभईया , ज्ञानेंद्र जी का सूत्र पूछकर मारना छोड़ दिए 😂😂
ReplyDeleteSinx का अवकलन बताओ 😂😂😂
Deleteहमारे नागा जी के हर लड़के का डायलोक "बगिचवा पार ना कर पयबे बाबू "
ReplyDelete"बाहर मिलो " जैसे बहुत सारे डायलोक थे।
आपकी ये कहानी नागा जी की सारी यादों को फिर से ताजी कर दी ।
बगइचा में घेरल जाइ 😂😂😂😂❤️
Deleteयार चेपु लंबा पेल दिए यार पुरानी यादें ताज़ा हो गई पूरे नागा जी मे अपना सेक्शन लीजेंड था बे ����
ReplyDeleteलीजेंड बनाने वाले तुम्ही लोग थे 😂😂
Deleteअद्भुत स्टोरी है 🤣👌👌👌
Deleteजब पढ़ना शुरू किया तो हस कर पढ़ना प्रारंभ किया और पढ़ते पढ़ते आंखे तो नम हो ही गई
ReplyDeleteएक बात का और दुख हुआ या अहसास है की अब वो समय कभी भी नही आने वाला😅
Chandan gupta
ReplyDeleteजब पढ़ना शुरू किया तो हस कर पढ़ना प्रारंभ किया और पढ़ते पढ़ते आंखे तो नम हो ही गई
एक बात का और दुख हुआ या अहसास है की अब वो समय कभी भी नही आने वाला😅