अधूरी राधा
आज प्यार भले फेसबुक से पैदा होकर whtas app पर जवान हो जाय..
लेकिन किसी जमाने में कालेज के सामने वाली चाट की दूकान से शुरू होकर दशहरा और जन्माष्टमी के मेला वाली जलेबी की दुकान पर ही मंजिल पाता था।….
शायद प्यार की मंजिल पाने वालों के साथ ट्रेजडी थी..क्योंकि प्यार के साथ टेक्नोलॉजी का गठबंधन न हुआ था ।लाइक,कमेंट,शेयर जैसे शब्दों की मौजूदगी का एहसास इतना व्यापक न था.
ऑनलाइन समय का दोष है…घर बैठे जोमैटो से बर्गर आ पिज़्ज़ा हट से पिज़्ज़ा माँगने वाली और एमेजॉन,फ्लिपकार्ट और स्नैपडील पर खरीदारी करने वाली पीढ़ी को अब ये मेले,ठेले,छोले,जलेबी रास नहीं आ रहे.
पर पुराना प्रेम का जिक्र तो आज भी उन्ही पुराने मेलो से सुरु होता है
नौकरी की हतास और पढ़ाई की झुलास से तपे जा रहे थे जीवन मे
रुक्मिणी के लिए पढ़ाई हो रही थी पर यहां तो इनके जीवन मे राधा तक के भी दर्शन न हुए थे अभी ...पूजा पाठ वाले विचार के थे तो सोचा चलो कृष्ण जन्म पर प्रभु के दर्शन ही हो जाये
चल दिय उदासीन ज़िन्दगी को मेला की रंगीन चौचक लाइटों के बीच टहलाते हुए
घर से दूर तो न त्योहार का मज़ा आता न खुशहाली
अचानक से देखते हैं एक सुंदर सा मुख दिए की बाती सीधा कर रहा है…कभी दुपट्टा सम्भालता है..कभी चेहरे पर लटके बालो को सीधा करता है…
”अरे ये तो वही है …बाप रे आज सज संवरकर इतनी सुंदर….. एकदम परी ।” मन ही मन मुस्कराये थे।
कैसी है आप?
अरे आप…यहां क्या हो रहा जी..….
उसने हंसते हुए पूछा था..
अरे आज देखने आ गए .... आज पूरा बनारस घूम रहा
हैं और हम यही रहकर न आएं…
नही नही आइए आप जैसो से ही तो रौनक होती है शाम की
बुद्धू शाम नही रात है अभी देखो 11 बजे है बड़े आये शायर
अरे भावना तो समझ गई न जी
ह ह तुम और तुंहरी भावना बड़ी कंप्लीकेडेड है बाबा
मेला चलता रहा वो दोनों बस थम कर बाते करने लगे थे
कुछ कहना था आपसे
क्या?
बोलिये..
वो कुछ नहीं वैसे आपका नाम क्या है?
अपना नाम बताकर खूब हंसी थी….
“सब जानते हैं हम जी किसके साथ आये हो बताओ ”..
मन ही मन कहते हुए दिए में ज्योति जलाया थ उसने
जिसका प्रकाश बनारस घाट पर कम पर लड़के के दिल में ज्यादा फैल गया था…
उनको एक पल लगा आज जन्म कृष्ण जी का है पर राधा उसको मिल गयी
किसके साथ आये हो जनाब बोलो अब
अरे नही हम तो अकेले के राही है ...
लड़की ने भौ ऊपर नीचे करते हुए कहा ""अच्छा जी प्रेम रस के पुजारी वो भी बिना राधा के
समझ लीजिए कभी कृष्ण न बन पाए तो राधा रानी का चांस न लगा जी
आये हए कृष्ण कन्हैया बड़ी इंतज़ार है राधा का
आओ कुछ खाते है
जी नही मा और भैया भी आये है वो लोग देख लिए न तो न हम खाने लायक रहेंगे न तुम खिलाने लायक
लो वो लोग आ गए दर्शन करके मैं चली जाओ तुम्हे भी देख लेंगे वो लोग
भगदौड़ी में भाटसेप (wtsapp) नम्बर तो छोड़ो कालेज का नाम तक पूछने की हिम्मत न हुई इस कन्हैया की
कुछ पूछ पाते की वो अधूरी राधा ओझल हो गयी भीड़ में
होते है कुछ ऐसे कृष्ण भी जो न बोल पाते कभी की "" राधा बनोगी मेरी""
लड़के को प्रेम की लालसा नहीं अपितु मित्रता की कामना करते है
उस दिन भी वो उसकी मित्रता में वो प्रेम जग गया की जीवन के हर कदम पर उसे सोच कर मुस्कुराता रहा कि
उस दिन वो मेरी राधा बनते बनते रह गयी ...!!!❤️
और कहानी खत्म हुई उस
शर्मिला कन्हैया ओर उसकी वो अधूरी राधा
-आशुतोष राज "आशु"
आपकी लिखावट में एक जादू है , अद्भुत😊👌👌
ReplyDelete❤️❤️❤️
Deleteअपना कमेंट अपने नाम के साथ जरूर दे
ReplyDelete💙Wonderful 💙
ReplyDeleteका लिखे हो राज़ एकदम 👌🏻👌🏻❤️❤️
ReplyDelete