सफ़रनामा ज़िन्दगी


कभी कभी लगता है हार गया हूँ! ज़िंदगी से! सब ख़त्म सा लगता है! कोई दिशा नहीं समझ आती! सब कुछ भ्रमित करता है! किसी इंसान से इन्स्पायर नही होता! कभी भी नही! हाँ ख़ूबी ज़रूर अच्छी लगती है किसी की! बहुत से पॉज़िटिव लोगों से घिरा हुआ हूँ!

क़िस्मत का धनी  होना ये भी है कि समझने वाला परिवार मिले , अच्छे दोस्त मिले ! पर एक समय बाद हार कोई आपसे उम्मीद करने लगता है! हर कोई! छोटा भाई, बहन, माँ-बाप सब! और ये बात बिना उनके बोले आप समझ सकते हैं!

कभी कभी खुद की समझदारी भी खुदसे कठिन सवाल पूछती है....
लगता है ज्यादा समझदार होना भी गुनाह है क्या ???

कई साथी आपको कई राय देते हैं! हिंदुस्तान में राय ही एक ऐसी चीज़ है जो आदमी मुफ़्त में देता रहता है! कई लोग आपको जज करते फिरते हैं! वो आपसे मिलते ही आपको बताना शुरू कर देते हैं कि आप ग़लत कहाँ पर है!  कई ऐसे लोग भी मिलते हैं जो आपके ऐसे शुभचिंतक होते हैं जो आपकी बड़ी से बड़ी हार पर भी आपसे सकारात्मक बात करा करते ह

कई बार चीज़ें धुंधली लगती हैं, समझ नही आता के पास हैं या दूर..
जैसे खिड़की पर बूँदो का जमना.......
देखने पर पास लगता है पर होता है पहुँच से दूर



मंज़िलें बदलती रहती हैं! नयी आती रहती हैं! रास्तों से इश्क़ लड़ाओगे तो अपनी मंज़िल से दूर होते जाओगे!

कुछ दर्द न समझ आते है और न समझाये जाते है ....
कुछ गलतिया ताउम्र याद रहती है...और कमजोरी क एहसास दिलाती रहती है ...
मुकदमा चलता रहता है खुद का खुद पर और सजा....सजा होती है खुद पर बिलखना ...

सच कहु तो झूठे है वो लोग जो कहते है लड़के रो नही सकते .......बस दर्द पूछने वाला होना चाहिये
क्योंकि यहां लड़को को चुप कराने से पहले ही बोल दियाजाता है "अरे मर्द रोते नही " पर रो लेने देना चाहिये

कभी कभी मन करे तो चीखे चिल्लाये और खुद को ही घुट घुट कर सज़ा दे ..किसी दूर पेड़ के नीचे बैठे और पैरो के घुटनो बीच सर रखकर आशु बहाये...और इंतज़ार करे खुद से ही खुद को संभालने का
मुश्किल वक़्तों को साझा करेंगे तभी हल्का रहेंगे आप

"वर्जिल" का कथन है की
ऐसा वक्त जरूर आएगा जब आप मुश्किल वक्त को भी खुश होकर सुनाएंगे।

नदी और कुएं में इतना का ही फर्क है
जितना का फर्क ठहराव और भटकाव में है

नदी प्यासे के पास जाती है जबकि प्यासा कुएं के पास जाता है
मतलब भटकाव आपके पास आएंगे पर आपको ठहराव के पास खुद जाना होगा
ज़िन्दगी में ठहराव बनिये भटकाव नही

कमजोर लम्हो को अपनी शक्ति बनाना ही उपाय है । म्रत्यु या जिंदगी , चुनाव कठिन नही होता

जैसी भी हो
पर थोड़ा सा जाग जाओ  मरने के बाद तो सो ही लेंना हैंं प्रतिस्पर्धा ख़ुद से करो
बाक़ियों को जूझने दो! अंत अच्छा हो न हो पर कभी भी जब आइने में शक्ल देखो तो नज़रे न चुराना पड़े

जिंदादिली ज़िंदाबाद 

   -आशुतोष राज"आशु"

Comments

  1. Kmzor lmho ko apni shkti banana hi upay hai,ldki ankh se but ladka dil se rota hai... Zindagi Ka rule h badhte chaliye...

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  2. Perfect 👍
    We have to struggle and face the challenges that's a life .

    ........ Auditor Nitesh Gupta

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