बनारस : शहर से इश्क़

बनारस शहर नहीं उत्सव है ! विश्व भर में यह अकेली नगरी है जहाँ, त्रयाक्ष भगवान शंकर की पुनर्जीवनी अग्नि घड़ी भर के लिए भी शांत नहीं होती ! 

मेरे हर बार लौट-लौटकर बनारस आने के पीछे, कोई वजह नही है 

बनारस ही बेवजह प्रेम है
सबका अपना बनारस है किसी के लिए घाट, किसी के लिए मंदिर,किसी के लिए गलियां,हम जैसों के लिए वो निर्माणधीन धूल खाता आधुनिकता की ओर बढ़ता खूबसूरत शहर ,जहां बार बार लौट कर आने की हसरत बनी रहती है,
BHU में एडमिशन की कोशिश हो , एग्जाम का सेंटर डाल कर आने की मन या दूर की शादिया निमंत्रण निभाने के बहाने बनारस जाने की चाहत  चंद लम्हो के लिए ही सही,अकेले नही उन यादो-वादो,,उन शामो और रातों की खातिर,एक कोशिश फिर से उसे जीने की बनारस आते जाते रहूंगा

.जहाँ हर कोई "गुरू" या "रज्जा" है...
किसी नशे की लत तो आम बात हैं, 
"नशा" जब किसी शहर का हो जाये, 
तो समझ लेना वो भैया बनारस है..!!
कहते है कि यहां भोले बाबा का सबसे पसन्दीदा प्रसाद "भांग" मिलता है पर आप थोड़ा ही लेंगे उसके बाद 
  बाबा खुदे हिलाने लगते है न विश्वास हो तो आइयेगा
 ...
यहाँ गंगा थम जाती हैं महादेव के चरणों मे...यहाँ मृत्यु भी उत्सव है ढोल नगाड़े की बीच.
..मणिकर्णिका पर प्रारंभ होता नवजीवन, जीवन की मणिकर्णिका पार करने के बाद..
           मणिकर्णिका घाट  

कहि पढा था सायद सत्य ही कहा है -------

! इसमें दश्वाश्वमेघ घाट से रैदास घाट तक गंगा के किनारे-किनारे एक ही बार में तुलसी-रामदास-कबीर-रैदास जैसै पुण्यपूर्वजों के पदचिह्न देख पाना संभव हो जाता है ! 
गलियों में न जाने कितने संगीत घरानों के लपेटे जी रहा है ये शहर आज भी
लंका पर चाट से लेकर घाट की हाजमोला-नींबू चाय तक,
आधुनिकता के बड़े बड़े मल्टीकम्प्लेक्स से लेके 
गंगा की पुरातन आरती तक
गौदवलिया के शोर शराबा वाला स्ट्रीट बाज़ार हो या रामनगर के शांत किला 
मंदिर के घण्टे घड़ियाल से लेके मस्जिदों के आज़न तक
बनारस अपने स्वाद-स्वरूप में अपने तीर्थ-स्वामी शंकर विश्वनाथ बाबा औघड़ है । यदि आप  मेरी तरह, बनारस की गलियों में “""साड़ सीढ़ी सन्यासी "" परिचित न हुए  “तीन लोक से न्यारी इस काशी” में नहीं भटके हैं तो अभी आपका  जन्म अपूर्ण ही है

शहरो  को कई तरह से जिया है। प्रेम ही हम सबको बेहतर शहरी बनाता है। 
प्रेम जो शहर के हर अनजान कोने का सामान करने लगते है। उन कोनो में यादों की ज़िंदगी भर देते है ।
जब आप एक शहर को नए सिरे से खोजते है तो वास्तव में आप प्रेम को प्राप्त कर रहे होते है

NON - BANARASI  हु 
.मैने जीवन यात्रा उस बनारस से आरंभ नही की है पर अंत हो तो बनारस के घाट बनकर जाऊ जिसे गंगा खुद धो कर बहा ले जाये 

हर हर शम्भो 🙏


- आशुतोष राज"आशु"

Comments

  1. शम्भो... 🙏🏻
    जियो राजा बनारस ❤️
    बहुते खूबसूरत, लाजवाब लिखे हैं 👌🏻

    ReplyDelete
  2. शम्भो... 🙏🏻
    जियो राजा बनारस ❤️
    बहुते खूबसूरत, लाजवाब लिखे हैं 👌🏻

    ReplyDelete
  3. क्या बात भाई साहब

    ReplyDelete
  4. उम्दा लिखावट है👌👌👌

    ReplyDelete
  5. लगता है प्रेम हो जाएगा अब आपसे

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

बनारस के तोहफे

ट्रेन वाली लड़की 🚂

सफ़रनामा ज़िन्दगी