इस प्यार को क्या नाम दु ????
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पर ये चिल्ड्रेन day वाले 14 नवम्बर से अब 14 फरवरी को कुच कर चुके है
ये स्कूली बच्चे जिनकी अभी अभी कच्ची मुछे तक नही आई है बॉलीवुडिया 16 वर्ष की उस बाली उम्र से भी कोसो दूर है फिर ये हुस्न ,बेवफा ,दगा , इश्कियत वाली शायरी क्यों करने लगते है ।
ये किस महबूब की खूबसूरती देख तड़प रहे है जो महबूब अपनी स्कूल ड्रेस भी मम्मी से प्रेस करवाती है वो भला इनके इश्क़ को कैसे आयरन कर देती होगी ।
कभी कभी सोचता हूं कि इनके माँ बाप इनके फेसबुक ,इंस्टाग्राम पर नही है क्या
होंगे भी तो उनको पतोहू के नखड़ा काउंट और खर्चा के लिये बैंक अकाउण्ट से फुर्सत कहा जो सोशल मीडिया अकाउण्ट पर ज्यादा फोकस करे
अगर फोकस करते तो इनके प्रेम प्रमेय का सन्दर्भ सहित व्याख्या इनके पश्च भाग अर्थात पिछवाड़े पर सुर्ख लाल अक्षरों से लिख दिए ।होते ।
यार जिस उम्र में हम अभी शक्तिमान देखकर तमराज किल्बिश को मारने में व्यस्त थे ..... ये उसी उम्र में प्रेम की विरह पराकाष्टा को प्राप्त कर लेते है
टिक टॉक पर पाउडर उड़ा कर लडकिया इम्प्रेस करने की कला से मेरी पीढ़ी के कुछ चूज़े आगे बढ़े ।
इंस्टाग्राम ने संभाला भी तो कितना भी पाऊडर उड़ा ले सकल तो आधार कार्ड वाले फ़ोटो की तरह ही रहेगी
हमारा बचपन तो डर में ही निकल गया
बचपन में तो हमें स्कूल की परीक्षाओं से डर लगता है ,डर लगता था उन रिश्तेदारों से जो 13 का पहाड़ा पूछ लते थे। या ये पूछ लेते थे कि सतहत्तर, अठत्तर और उनहत्तर में सबसे बड़ा कौन है? हमे डर लगता है उन लोगों से जो मुझसे कर्नल और लेफ्टिनेंट की स्पेलिंग पूछ लेते थे, या पूछ लेते थे राम का शब्द रूप या कोई लृट लकार की धातुरूप
और आजकल के ये चमकीले चूज़े टोनी कक्कर और प्याज अली को आदर्श मानकर आगे बढ़ रहे है
इधर कल एक 12 साल के लड़के का फेसबुक पोस्ट देखा " your love is my energy (तुम्हारा प्यार मेरी ऊर्जा है )
ये देख कर दो मिनट के लिए मेरा खुद का हीमोग्लोबिन डाउन हो गया ....ऐसा लगा बिना कोरोना के कोरण्टीन न होना पड़ जाए । तब तक कॉमेंट सेक्सन में देखा चारु चंचल कन्याये भी चार दिल के सिम्बल छोड़ कर लिख रही U too ..
फिर पता लगा इनकी वैक्सीन तो ये है ....
कभी ऐसा पोस्ट देखकर मुझे अपने लड़कपन पर शक होता है। मैंने इतने सालों में ऐसी सायरी क्यो नही की । इतनी खूबसूरत लडकिया मौजूद थी मैने क्यों कि किसी के इनबॉक्स में नही गया , क्यों नही बोल पाया " hii good morning "
सायद ऐसी आधुनिकता वाली कन्याये हमें न मिली
ख़ैर मिलती भी कैसे हम विधा मन्दिर के स्टूडेंट जो ठहरे
कहा मैं देश के GDP के सूचकांक में उलझा हुआ हूं । बेरोज़गारी की चिंता मेरे मन मे मोदीजी के दाढ़ी की तरह बढ़ती जा रही है । और दिल आशिक़ी और महबूबा के समय राहुल गांधी बने फिरता लूसेन्ट और लक्ष्मीकांत की किताबो की तरफ भागा जा रहा है ।
और उम्मीदे सिंघु बॉडर पर धरना दिए बैठी है ।
तैयार होने के टाइम में तैयारी कर रहे है .... भला हो हम जैसे का
लगता है कि मुझे देह में घी लगाकर अब प्रयागराज के माघ मेले में कल्पवास ले लेना चाहिए या अभी एक अटेम्प्ट SSC ,UPSC के साथ प्यार वाला भी देना चाहिए क्या ???????????????????
- आशुतोष राज "आशु❤️
वाह गुरु लाजवाब
ReplyDeleteखुबे सुघर 👌🏻 👌🏻 ❤️❤️
गुरु खेल गए
ReplyDeleteएक बार फिर से 🌹🌹❤💘
Gjb bro
ReplyDeleteKeep it up
👏👏👏
ReplyDeleteKeep it up..
वाह रे मेरे शेर......पुरा बचपन याद दिला दिया
ReplyDeleteHeyoo...boss...you made remember our childhood...🌸😘
DeleteThank you jass
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